Tuesday, December 2, 2008

AAj ki Dilli or Insaan

आज की दिल्ली और इंसान 


"बदलते भारत की नई पहचान 
मेरी दिल्ली मेरी जान "

हर तरफ आदमी हो रहा परेशान !
मन्दिर में बैठा खुश हो रहा भगवान !!
छप्पन भोग और हीरे मोती आज मूर्तियोँ  के पास !
दो जून की रोटी को तरस रहा इंसान !!
                   जोर से बोलो मेरी दिल्ली मेरी जान !

बेरोजगारी में महंगाई की मार खा के !
ब्रूश ली जेसे सींक हो गए पहलवान !!
पता नहीं अब इस जीवन की कितनी साँसे बाकी है !
यूंही घुट घुट कर कव निकल जाएँगी जान !!


     मुख से निकलेगा मेरी दिल्ली  हाय राम !!


  
                                                      Palak Chauhan



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