आज की दिल्ली और इंसान
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"बदलते भारत की नई पहचान
मेरी दिल्ली मेरी जान "
हर तरफ आदमी हो रहा परेशान !
मन्दिर में बैठा खुश हो रहा भगवान !!
छप्पन भोग और हीरे मोती आज मूर्तियोँ के पास !
दो जून की रोटी को तरस रहा इंसान !!
जोर से बोलो मेरी दिल्ली मेरी जान !
बेरोजगारी में महंगाई की मार खा के !
ब्रूश ली जेसे सींक हो गए पहलवान !!
पता नहीं अब इस जीवन की कितनी साँसे बाकी है !
यूंही घुट घुट कर कव निकल जाएँगी जान !!
मुख से निकलेगा मेरी दिल्ली हाय राम !!
Palak Chauhan


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