Saturday, August 6, 2011

Aam Admi

आम आदमी और आम !

आम आदमी अब आम ही रह गया है
हर कोई उसे पकाकर उस का जूस तो
कोई उस का अचार बनाना चाहता है

कोई भी उसकी खूबी को नहीं जानना चाहता
बस उसे एक बार तोडना चाहता है

ये भी नहीं देखता की ये कच्चा है
या पक्का बस उस पर निसाना लगाना चाहता है

पलक चौहान